कानूनी प्रश्न
आपसी सहमती से तलाक क्या है ?
भारतीय कानून में आपसी सहमती से तलाक से तात्पर्य है की जहाँ दोनों पक्षों ( पति और पत्नी , अपनी मर्जी से, शांति से अपनी शादी खत्म करने से सहमत हो जाते है |
आपसी सहमती से तलाक के लये कुछ मुख्य बाते इस प्रकार है -
समझौता -
दोनों पक्षों को ( पति और पत्नी को ) तलाक और तलाक निपटने की शर्तो के लिए सहमत होना है , जिसमे बच्चे की हिरासत, गुजरा भत्ता , सपंती का विभाजन आदि जैसे मुद्दे शामिल है |
याचीका -
दोनों पक्षों द्वारा तलाक के लिए एक संयुक्त याचिका पारिवारिक न्यायालय के समक्ष दायर की जाती है | याचिका में विवाह, तलाक के लिये समझौते और समझौते की शर्तो के बारे में विवरण शामिल होना चाहिए | 6 माह की प्रतीक्षा अवधि: संयुक्त याचिका दायर करने के बाद, 6 माह की अनिवार्य कुलिंग - आफ़ अवधि होगी | यह अवधि प्रधान करने का उद्देश्य, पति पत्नी को अपने निर्णय पर पुर्नविचार करने और अगर संभव हो तो सुलह करने के के लिए दी जाती है |
दूसरा प्रस्ताव -
कुलिंग - आफ अवधि समाप्त होने के बाद , पति और पत्नी ( दोनों पक्षों को ) अदालत में पेश होना पड़ेगा और तलाक के लिए अपनी सहमती की पुष्टि करनी होगी | तलाक की कार्यवाही को अंतिम रूप देने के लिए दूसरा प्रस्ताव आवश्यक है |
समझौता समझौता -
पति और पत्नी को संयुक्त याचिका के साथ, समझौता समझौता प्रस्तुत करना होगा जिसमे यह बताया जायेगा की वे रखरखाव , सम्पति के विभाजन, बच्चे की हिरासत आदि मुद्दों से निपटने के लिए किस प्रकार सहमत हुए है |
कोई प्रतिवाद नहीं -
आपसी सहमती से तलाक में , कोई पक्ष तलाक की याचिका का प्रतिवाद नहीं करता है | दोनों पक्ष ( पति और पत्नी ) पूरी प्रक्रिया में सहयोग करते है, जिससे यह अन्य किसी तलाक की तुलना मे अत्यधिक सहज और कम विवादास्पद प्रक्रिया बन जाती है |
अंतिम डिक्री -
जब एक बार अदालत संतुष्ट हो जाती है की कानूनी आवश्कताए पूर्ण हो गई है और पति और पत्नी ( दोनों पक्ष ) आपसी सहमति से तलाक के लिए तैयार है , तो तलाक की अंतिम डिक्री जरी कर दी जाती है | तब अधिकारिक तौर पर विवाह समाप्त हो जाता है |

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